Jun 22, 2007

मैं

मैं नयी उम्मीद लाती हूँ
हर नए दिन के साथ
मैं ही ख्वाबो के तोहफे भेजती हूँ
अँधेरी रातों के हाथ

दुनिया के हर सुर में
मेरा ही तराना है
दुनिया कि हर शै में
मेरा ही फ़साना हैं

आपका हर सुकून
मेरी मुस्कान में खिलता हैं
आपका हर गम
मेरी आसूओं में ढलता हैं

कभी तनहाई मे आप जो सोचो
कि मैं नही हूँ, कही नही हूँ
तो ज़रा अपने दिल से पूछिये
मैं वही हूँ ... वही कही हूँ ..

बुत को भी जो खुदा बना दे
मैं वो बंदगी हूँ
क्योंकि मैं ..
मैं तो खुद जिन्दगी हूँ ....

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