Jul 11, 2007

यादें

कभी तनहाई में साथ निभाऐं
तो कभी महफील में तनहा कर जाऐं
जब आऐं तो साथ ले जाऐं
सपनों में आकर नींदें चुराऐं
परायी होकर भी अपनी सी
वो अपनों की बातें, ये खट्टी मीठी यादें

अंधेरेमें ये शमा जलातीं हैं
धूप में लेकिन छांव बन जातीं हैं
मुस्कुराती आंखों में
हल्केसे आंसू ले आतीं हैं
कोई खोई- खोई कहानी सी
वो अपनों की बातें, ये खट्टी मीठी यादें

जिनकी यादें साथ हैं,
वो दूर होकर भी पास हैं
ख्यालों में ही सही
पर दिल को ये एहसास है
खामोशी की खुशबू सी
वो अपनों की बातें, ये खट्टी मीठी यादें

1 comments:

amol said...

कभी तनहाई में साथ निभाऐं
तो कभी महफील में तनहा कर जाऐं

How true friend!! I am happy with my past thoughts, even if they make me feel alone in crowd I have no complains.
Beatiful lines....