Jul 12, 2007

सपने

खुशियों का प्याला कभी, भरा ना मिले तो क्या?
राहों मे फूलों कि जगह बिछे हो कांटे तो क्या?
मन कि उमंगें सदा आसमान छुनेवाली हो
सपने हमारी आंखों के कतई ना खाली हो



जुदाई जो बन जाये मुकद्दर कभी, तो दर्द हो दिल में गिला नही
जिंदगी तो जिन्दादिली को कहते हैं, ये महज साँसों का सिलसिला नही
आख़िरी दम तक होंठों कि मुस्कान नयी निराली हो,
सपने हमारी आंखों के कतई ना खाली हो


आंसूओं के बेशकीमती मोती, पलकों का दायरा ना तोड़े
आहों का उमड़ता सैलाब होंठों का साहिल ना छोडे
तनहाई देने वालों के लिए दुवाएं महफिल सजाने वाली हों
सपने हमारी आंखों के कतई ना खाली हो

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